बाबर के वंशज जब जब भी अपना उत्पात मचाएँगे
राणा सांगा के बेटे तब भालों पे मुण्ड चढ़ाएँगे
बेटी बहन की चीख़ों से अकबर के हरम जब गूंजेंगे
मेवाड़ी राणा के भाले मुग़लों की छाती चीरेंगे
आदिल शाह के अफ़ज़ल जब बेटी कोई उठाएँगे
छत्रपति के हाथों तब अंतड़ियाँ खोकर जाएँगे
औरंगज़ेबी हाथ कभी हिंदू उपवीत जलाएँगे
गुरु तेग बहादुर हिन्द दी चादर बन कर आएँगे
शाह वज़ीर के हत्यारे ईमान फैलाने आएँगे
गोबिन्द गुरु के बच्चे तब दीवार में चिन जाएँगे
फिर कोई वैरागी वीतराग प्रतिशोध लेने आएँगे
शाह जिहादी का मस्तक शिशु चरणों में पाएँगे
गौघातक जब जब भी माता को काटकर जाएँगे
हरी सिंह नलवा के हाथों तंदूर में भूने जाएँगे
सोमनाथ के बुत पर गर गजनी के घोड़े आएँगे
गजनी के खुदाओं पर घोड़े बुतपरस्त दौड़ाएँगे
जो “बुत गिरवाए जाएँगे बस नाम रहेगा अल्लाह का”?
क्या मक्का क्या दिल्ली बस नाम रहेगा विष्णु का।
हम देखेंगे।।